Tuesday, 26 January 2016
vindhyaachl prasad gupt -wikipedia
विंध्याचल प्रसाद गुप्त
नाम - : विंध्याचल प्रसाद गुप्त (कवि )
जन्म - : 26 अक्टूबर 1915
मृत्यु :24 जुलाई 1992
जन्म स्थान : चनपटिया , ( पश्चिम चम्पारण ) बिहार
पिता : स्व. बनारसी साह
शिक्षा : राष्ट्रीय विधालय चनपटिया , काशी विधापीठ से उच्च शिक्षा
क्रान्ति के यात्री बने : किशोरावस्था से ही स्वतन्त्रता संग्राम में संलिप्त रहे । चम्पारण के सशस्त्र क्रान्तिकारियों कमलनाथ तिवारी , केदारमणि शुक्ल , कपिलदेव राय , गुलाबचन्द गुप्त ' गुलाली ' एवं प्रख्यात नेता डा. राम मनोहर लोहिया के निकट सम्पर्क में रहे ।स्वतन्त्रता संग्राम में नमक सत्याग्रह से अगस्त की निर्णायक क्रान्ति तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ।
1937 से लेखन का जो आरम्भ हुआ वह जीवनपर्यन्त चलता रहा ।अपने क्रांतिकारी मित्रो और बन्धुओं के त्याग , तपस्या और उनके बलिदान की गथा जन -जन तक पहुचाना अपना पावन कर्तव्य मानकर लेखन को ही सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर दिया ।
उनकी रचनायें :
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उपन्यास : भीगी आँखे (1946) , कांटो को राह में जयप्रकाश और उनके साथी (1947), लहरो के बिच(1949) , राह का पत्थर ,हंसती आँखे , आधी रात , किनारे की ओर , नीली साडी ,आग और आँसू , तूफ़ान के तिनके , मीठी आग , मंजिल के राही , चम्पारण और निल के धब्बे (1959) , सिमा और उड़ान , छोटे बड़े लोग (1985), क्रांतिकारी : भूले बिसरे और क्रान्ति - यात्रा ।
कथा संग्रह : मुस्कान (1939),बिखरे आँसू , बलिदान की कहानियाँ ।
कविता संग्रह : आंधी पानी , सूरज चाँद सितारे ।
नाट्य कृति : शीशदान ।
बाल उपन्यास : अंतरिक्ष में नया लोक , कल्लू काका , बाघ हमारे साथी ।
एकांकी : लहरें , सिकन्दर जब चला , पीपल के पत्ते , अमिट रेखायें ।
उपर्युक्त कृति के अलावे अनेक रचनायें यत्र तत्र पत्र -पत्रिकाओ में बिखरे पड़े है ।
Saturday, 9 January 2016
हे मजदूर किसान ! नमस्कार !
हे मजदूर किसान ! नमस्कार !
हे मजदूर किसान ! नमस्कार !
सोने - चांदी से नही किंतु
तुमने मिटटी से किया प्यार ।
हे मजदूर किसान ! नमस्कार !
ये खेत तुम्हारी भरी - सृष्टि
तिल-तिल कर बोये प्राण बिज
बर्षा के दिन तुम गिनते हो ,
यह परिवार है , यह दूज , तीज
बादल वैसे ही चले गये ,
प्यासी धरती पायी न भीज
तुम अश्रु कणों से रहे सींच
इन खेतो की दुःख भरी खीज
बस चार अन्न के दाने ही
नैवेध तुम्हारा है उदर
हे मजदूर किसान ! नमस्कार !
Thursday, 7 January 2016
जा हम तुमसे बात नही करेगे
पठानकोठ हमले के बाद मोदी जी ने पाकिस्तान को मुंहतोड़ जबाब दिया जिसे पाकिस्तान को छठी का दूध याद आगया, बोले जा हम तुमसे बात नही करेगें ।इसे पाकिस्तान डर के मारे कापने लगा ।
दरअसल , आतंकवादी हमलो से जुड़े हादसों की भी एक शब्दवाली बन गई है ।एकदम अलग ।जो समूचे देश में एक तरह से बिना भेद भाव लागू है ।देश में सरकारे चाहे किसी की भी हो ।कांग्रेस हो , भाजपा हो या फिर किसी भी गठबंधन की हो ।निंदा , शक , हाईअलर्ट , मुआवजे का एलान आदि ।जांच कमिटी । आतंकियों का स्केच जारी करना , आम जनता से भाईचारे एवं सम्प्रदायिक सौहार्द बनाये रखने का अपील करना ।और दिल्ली में आपात बैठक बुलाये जाने के बाद वही ढाक के तीन पात ।और हां यह जुमला हमेशा की तरह , भारत इस आतंकवादी घटना का घोर निंदा करती है ।हम इस कायराना हरकत का मुंहतोड़ जबाब देगें ।ऐसी कायराना हरकतों से भारत हिलने वाला नही ।हम ऐसी हमलो का डट कर मुकबला करने के लिये तैयार है ।दो चार दिन बाद फिर से सब कुछ पटरी पर । लोग भूल जाते है ठीक उस दिन तक जब तक कि फिर कोई दूसरा आतंकवादी हमला नही होता ।
दरअसल , आतंकवादी हमलो से जुड़े हादसों की भी एक शब्दवाली बन गई है ।एकदम अलग ।जो समूचे देश में एक तरह से बिना भेद भाव लागू है ।देश में सरकारे चाहे किसी की भी हो ।कांग्रेस हो , भाजपा हो या फिर किसी भी गठबंधन की हो ।निंदा , शक , हाईअलर्ट , मुआवजे का एलान आदि ।जांच कमिटी । आतंकियों का स्केच जारी करना , आम जनता से भाईचारे एवं सम्प्रदायिक सौहार्द बनाये रखने का अपील करना ।और दिल्ली में आपात बैठक बुलाये जाने के बाद वही ढाक के तीन पात ।और हां यह जुमला हमेशा की तरह , भारत इस आतंकवादी घटना का घोर निंदा करती है ।हम इस कायराना हरकत का मुंहतोड़ जबाब देगें ।ऐसी कायराना हरकतों से भारत हिलने वाला नही ।हम ऐसी हमलो का डट कर मुकबला करने के लिये तैयार है ।दो चार दिन बाद फिर से सब कुछ पटरी पर । लोग भूल जाते है ठीक उस दिन तक जब तक कि फिर कोई दूसरा आतंकवादी हमला नही होता ।
Thursday, 31 December 2015
आओ हमसब मिलजुल कर (2016)नव बर्ष का पर्व मनाये
आओ हम सब मिल जुल कर
नव बर्ष का पर्व मनाये
************************
राष्ट्र हितों के लिये समर्पित
हो फिर से सर्वस्व हमारा
गौरव मंडित हो भारत यह
सत्य धर्म का मिले सहारा
त्यागे हम सब स्वार्थ भावना
परमार्थ का पथ अपनाए
आओ हम सब मिल जुल कर
नव बर्ष का पर्व मनाये
भष्ट्राचार मिठे शासन का
शुद्व बने आचरण हमारा
अनाचार से लोहा लेने
बढ़े युवक भारत का सारा
अनुशासित हो कर्मी सारे
सत्य कर्मो को गले लगाये
आओ हम सब मिल जुल कर
नव बर्ष का पर्व मनाये
भगत -सुभाष -शिवा-राणा का
गूँजे भू पर गौरव गान
राम कृष्ण की परम्परा को
मिले पुनः भू पर सम्मान
सारे महि मण्डल को हम फिर
एक नया आलोक दिखाएं
आओ हम सब मिल जुल कर
नव बर्ष का पर्व मनाये
मित्र बने आपस में हम सब
मित्र भाव का हो विस्तार
उग्रवाद , आतंकवाद का
हो अति शीघ्र यहां निस्तार
बच्चे-बच्चे इस भारत के
शौर्य शील - बलशील कहाऐ
आओ हम सब मिलजुल कर
नव बर्ष का पर्व मनाएं
सुख समृद्धि सफलता का
हो हमारे जीवन में विस्तारण
सभी समस्याओ का हो फिर
यथा योग्य सम्पूर्ण निवारण
समरस हो सारा समाज यह
मानावत काबने हितैषी
सभी सुखी सम्पन्न बने फिर
प्रगति करें हम भौतिक ऐसी
राष्ट्र अस्मिता की रक्षा हित
हर्षित होकर प्राण लुटाएं
आओ हम सब मिलजुल कर
नव बर्ष का पर्व मनाये ।।
नव बर्ष का पर्व मनाये
************************
राष्ट्र हितों के लिये समर्पित
हो फिर से सर्वस्व हमारा
गौरव मंडित हो भारत यह
सत्य धर्म का मिले सहारा
त्यागे हम सब स्वार्थ भावना
परमार्थ का पथ अपनाए
आओ हम सब मिल जुल कर
नव बर्ष का पर्व मनाये
भष्ट्राचार मिठे शासन का
शुद्व बने आचरण हमारा
अनाचार से लोहा लेने
बढ़े युवक भारत का सारा
अनुशासित हो कर्मी सारे
सत्य कर्मो को गले लगाये
आओ हम सब मिल जुल कर
नव बर्ष का पर्व मनाये
भगत -सुभाष -शिवा-राणा का
गूँजे भू पर गौरव गान
राम कृष्ण की परम्परा को
मिले पुनः भू पर सम्मान
सारे महि मण्डल को हम फिर
एक नया आलोक दिखाएं
आओ हम सब मिल जुल कर
नव बर्ष का पर्व मनाये
मित्र बने आपस में हम सब
मित्र भाव का हो विस्तार
उग्रवाद , आतंकवाद का
हो अति शीघ्र यहां निस्तार
बच्चे-बच्चे इस भारत के
शौर्य शील - बलशील कहाऐ
आओ हम सब मिलजुल कर
नव बर्ष का पर्व मनाएं
सुख समृद्धि सफलता का
हो हमारे जीवन में विस्तारण
सभी समस्याओ का हो फिर
यथा योग्य सम्पूर्ण निवारण
समरस हो सारा समाज यह
मानावत काबने हितैषी
सभी सुखी सम्पन्न बने फिर
प्रगति करें हम भौतिक ऐसी
राष्ट्र अस्मिता की रक्षा हित
हर्षित होकर प्राण लुटाएं
आओ हम सब मिलजुल कर
नव बर्ष का पर्व मनाये ।।
Sunday, 27 December 2015
जागो आंधी उठाने का जमा ना आ गया है
जागो आंधी उठाने का जमाना आ गया है
जागो आंधी उठाने का जमाना आ गया ,
दे रहा आदमी का दर्द अब आवाज दर-दर ,
तुम न जागो तो कहो जमाना क्या कहेगा ,
जब बहररों का नीलाम पतझर कर रहा है ,
तुम नही फिर भी उठे तो आशियाना क्या कहेगा ,
वक्त की तकदीर स्याही से, लिखी जाती नही है ,
खून में कलम डुबोने का जमाना आ गया है ,
बदतमीजी कर रहे है आज ,
फिर भौरे चमन में जागो ,
आंधी उठाने को जमाना आ गया है ।।
Saturday, 26 December 2015
उठ देश कर त्राहि- त्राहि
उठ देश कर त्राहि - त्राहि
उठ देश कर त्राहि - त्राहि अब तो इसे बचाओ ,
एक बार भारत भू पर फिर माँ दुर्गे तुम आओ ,
प्रलय काल की दुंदभी , गरल- सिंधु उफनाया ,
अनय वहि की लपटो में, सारा संसार समाया ,
हुआ राष्ट्र शापित , शापो पर अब तो नजर गड़ाओ ,
एक बार भारत भू पर फिर माँ दुर्गे तुम आओ ,
अभय दान दो पशुता से , जकड़ी नरिह नरता को ,
हिंसा की जिह्वा पर बैठी , चीख रही जनता को ,
छली जा रही है संस्कृति , जड़ता को मार भगाओ ,
एक बार भारत भू पर फिर माँ दुर्गे तुम आओ ,
छल प्रपंच के कीचड़ दे , यह भरी हुई धरती है ,
उधर वासना तृषण फण , फैलाये से चलती है ,
लूट रही भारत की जनता को इन अत्याचारियों से बचाओ ,
एक बार भारत भू पर फिर माँ दुर्गे तुम आओ ।।
तो कौन प्रेम की सरिता बहाये
तो कौन प्रेम की सरिता बहाये
जब ढोंग नाग बनकर डंसने लगे
आदर्श नागफेनी से चुभने लगे
कृतिया मवाद सी बहने लगे
धर्म आतंक बनने लगे
तो ह्रदय के दग्ध कोने में
कौन प्रेम की सरिता बहाये --?
झूठी कल्पनाये
सारी जिंदगी हम बिस्तर बनने लगे
तो प्रेयसि और प्रियतम की सच्चाई
कहा तक होगी --?
जब घर घर विभीषण होने लगे
तो राम और लक्षमण की परिभाषा कैसी -----?
धन लगी जिंदगी में
विवाद बढ़ने लगे
रोपता फूलो को हूँ
कैक्टस उगने लगे
तो कैक्टस और नरगिस में अंतर कैसा ---?
जब से मिट गए है फर्क
उच्चता और निम्नता के
बदल गए है है सन्दर्भ आदर्श के
आ गयी है सीलन जीवन में
जहर पलने लगी है हरेक पेट में
और
कहते फिरते है हम अमृत उसे
सिलवटे पड़ने लगी है हरेक विस्तर में
दर्द के फफोले उगने लगे हरेक चेहरे में
न जाने आतंक कैसा हो
आशंका घेर रही है अभी से हमे ---?
Friday, 25 December 2015
आजादी का कत्ल हुआ है, आजादी के गांव में
गली गली है यही वेदनां ,शहर -शहर हर गावं में ,
आजादी का कत्ल हुआ है, आजादी के गावं में ।
लोकतंत्र अभिशाप बन गया ,संसद आहे भरती है ,
नेताओं के नंगेपन से , भारत माता डरती है ।
निशदिन द्रोपदियो की , इज्जत लगी हुई है दाव पर ,
आजादी का कत्ल हुआ है ,आजादी के गांव में ,
संतरी से लेकर मंत्री तक , धन वैभव का होड़ है ,
देश धर्म के हत्यारों का कदम -कदम पर जोड़ है ,
कफ़न खसोटू बैठे सारे , कानूनों की नए में ,
आजादी का कत्ल जुआ है , आजादी के गांव में ।।
आजादी का कत्ल हुआ है, आजादी के गावं में ।
लोकतंत्र अभिशाप बन गया ,संसद आहे भरती है ,
नेताओं के नंगेपन से , भारत माता डरती है ।
निशदिन द्रोपदियो की , इज्जत लगी हुई है दाव पर ,
आजादी का कत्ल हुआ है ,आजादी के गांव में ,
संतरी से लेकर मंत्री तक , धन वैभव का होड़ है ,
देश धर्म के हत्यारों का कदम -कदम पर जोड़ है ,
कफ़न खसोटू बैठे सारे , कानूनों की नए में ,
आजादी का कत्ल जुआ है , आजादी के गांव में ।।
अन्याय सहना अन्याय करने से ज्यादा खतरनाक है
हम लोग कायरता के विरुद्ध पढ़ बोल और सुन तो सकते है पर कर कुछ नही सकते , कायरता का विषाणु हमारे अंदर घुस आये है , तभी तो सर और खौफ का मंजर समाप्त न होता ।अन्याय सहना अन्याय करने से ज्यादा खतरनाक है ।
हमे अपने संस्कार और संस्कृति दोनों की रक्षा में आगे आना होगा
हमें अपने संस्कार और संस्कृति दोनों की रक्षा में आगे आना होगा । भारत में बहुत कुछ है जो विश्व में कही नही है। हमारी संस्कृति की यह विशेषता है की वह अजर अमर है । किन्तु 68 वर्षो में हम जात-पात , सम्प्रदाय और ऊंच-नीच में बटते चले गये और बन्धुत्व को भूल गये । चिड़ियों और चींटियों की चिंता करने वाला हमारा समाज हिंसक बनता जा रहा है ।नफरत की फसल लगाने की होड़ लग गयी है ।अग्नि से यज्ञ करने के बजाए हम लोग आग लगाने में जुट गए है ।
निशाचरी शक्तियों का अभिशाप
देश लूट रहा है , पिट रहा है , आताताई , अराजक , निशाचरी शक्तियों का आतंक देश के जन जीवन के लिये स्थायी अभिशाप बनता जा रहा है ।
पचास साठ करोड़ लोग
सत्ताधीशो के तमाम दावेवेदारियों के बावजूद अभी भी पचास साठ करोड़ लोग बे मकान , बे रोटी लोगो का यह देश जिस अँधेरी सुरंग से गुजर रहा है उसका दूसरा सिर दूर -दूर तक नजर नही आता ।
यहां पे जिंदगी महंगी है मौत सस्ती है
खुदा हमको बता दो , यह कैसी बस्ती है
खुदा हमको बतादो,यह कैसी बस्ती है ,
जहां जिंदगी के परदे में ,मौत पलती है ,
किसी की पाव तो पड़ते है फर्श मखमल पर
किसी की लाश कफ़न के लिये तरसती है ,
मेरे पड़ोस के जालिम ने लूट ली अस्मत,
कोई जवां लड़की यह कहती है और जलती है ,
यह कौन लोग है, मख्लूक कौन सी है ?
गर्दन को काट के कहते है , मस्ती मस्ती हैं ,
खुदा के घर को गिराते है और कहते है ,
आवाज बुलन्द करो , खुदा की यह बस्ती है ,
न इनको खौफ -ए-खुदा है और न आदमी का ख्याल ,
यह कैसा धर्म है जहां , इंसानियत सिसकती है ,
जवां गुचों को कुचलो , कली मसल डालो ,
यहाँ पे जिंदगी महंगी है , मौत सस्ती है ।
कृषि प्रधान देश
पहले था कृषि प्रधान देश ,
सचमुच था ऋषि प्रधान देश ,
पहले था आत्मीयता प्रधान देश ,
वास्तव में संस्कृति प्रधान देश ,
मगर आज हो गया है ---
कुर्सी प्रधान देश ,
मातम पुर्सी प्रधान देश ,
नौटँकी प्रधान देश ,
ढपोरशंखी प्रधान देश ,
घोटाला प्रधान देश ,
गड़बड़झाला प्रधान देश ,
भाषण प्रधान देश ,
कुशासन प्रधान देश ,
खुदगर्जी प्रधान देश ,
खुदमरजी प्रधान देश ,
आबादी प्रधान देश ,
बर्बादी प्रधान देश -
सचमुच था ऋषि प्रधान देश ,
पहले था आत्मीयता प्रधान देश ,
वास्तव में संस्कृति प्रधान देश ,
मगर आज हो गया है ---
कुर्सी प्रधान देश ,
मातम पुर्सी प्रधान देश ,
नौटँकी प्रधान देश ,
ढपोरशंखी प्रधान देश ,
घोटाला प्रधान देश ,
गड़बड़झाला प्रधान देश ,
भाषण प्रधान देश ,
कुशासन प्रधान देश ,
खुदगर्जी प्रधान देश ,
खुदमरजी प्रधान देश ,
आबादी प्रधान देश ,
बर्बादी प्रधान देश -
Thursday, 24 December 2015
गुंडा बना नेता या नेता बना गुंडा
गुंडा बना नेता या नेता बना गुंडा
वर्तमान लोकतन्त्र में नेता और गुंडा चोली और दामन की भांति एक दूसरे के अविभाज्य अंग बन गये हैं ।यह निश्चित कर पाना अति दुष्कर हो गया है कि कौन बड़ा है और कौन छोटा । गुंडे से बड़े है नेता , नेता से बड़ा है गुंडा पता नही भारत की नैया को कौन खेता है नेता बिच गुंडा है , कि गुंडा बिच नेता है कि गुंडा बना नेता है , की नेता बना गुंडा है ।
जबरन बन गए मालिक
जबरन बन गए मालिक जो चौकीदार है
जबरन बन गये मालिक जो चोकीदार है ,
कागजी था शेर अब भेड़िया खूंखार है,
हमारी गलतियों का नतीजा ये हमारी सरकार है ,
सर से पैर तक एहशांफ़रामोशी भरी है जिनके ,
और हर इक रंग भी इसकी शातिरों-मक्कार है ,
हमारे ही वोटो से पुश्ते इनकी पलती है मगर ,
हमपे ही गुर्राए ...हद दर्जे का गद्दार हैं ,
अपनी खिदमत के लिये हमने बनाया खुद इसे ,
घर का जबरन बन गया मालिक जो चोकीदार है ,
निभ सकी न इससे अब तक अपनी जिम्मेदारियां ,
चन्द दिनों में रुखसती का दिख रहा आसार है ,
सब तेरी मनमानियां सह ली मगर सुन ,
फैसला करने को जनता देश को तैयार है ,
पूजना शैतान को हमारी मजबूरी नही ,
वोट ही हम लोगो की अहम तलवार है ।
किसी ने अल्लहा के नाम पे तो किसी ने राम के नाम पे
लड़ाया तो हमे सबने
लड़ाया तो हमे सबने ,
किसी ने अल्लाह के नाम पे लडाया ,
किसी ने राम के नाम पे लड़ाया ,
जो नही लड़े उन्हें दगाबाज कह के लड़ाया ।
जो इंसान को इंसान बनाता है
हर दर्द को हम उठाने के लिए तैयार है
हर दर्द को हम उठाने के लिये तैयार है
सिर्फ उस एहसास के लिये.....
वही एहसास ........
जो इंसान को इंसान बनाता है ।
नंगी आँखो से देखा जब दुनिया का मंजर
नंगी आँखों से देखा जब दुनिया का मंजर
नंगी आँखो से देखा जब हमने दुनिया का मंजर ।
मुख में बाणी थी मीठी मगर पीठ के पीछे था खंजर ।।
आज यही आलम दुनिया में हर तरफ पसरा है ।
जिस धरती पर नाज था हमें आज हो गया है बंजर ।।
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