Thursday, 24 December 2015

गुंडा बना नेता या नेता बना गुंडा

गुंडा बना नेता या नेता बना गुंडा


वर्तमान लोकतन्त्र में नेता और गुंडा चोली और दामन की भांति एक दूसरे के अविभाज्य अंग बन गये हैं ।यह निश्चित कर पाना अति दुष्कर हो गया है कि कौन बड़ा है और कौन छोटा । गुंडे से बड़े है नेता , नेता से बड़ा है गुंडा पता नही भारत की नैया को कौन खेता है नेता बिच गुंडा है , कि गुंडा बिच नेता है कि गुंडा बना नेता है , की नेता बना गुंडा है ।

जबरन बन गए मालिक

जबरन बन गए मालिक जो चौकीदार है




जबरन बन गये मालिक जो चोकीदार है ,
 कागजी था शेर अब भेड़िया खूंखार है,
हमारी गलतियों का नतीजा ये हमारी सरकार है ,
सर से पैर तक एहशांफ़रामोशी भरी है जिनके ,
और हर इक रंग भी इसकी शातिरों-मक्कार है ,
हमारे ही वोटो से पुश्ते इनकी पलती है मगर ,
हमपे ही गुर्राए ...हद दर्जे का गद्दार हैं ,
 अपनी खिदमत के लिये हमने बनाया खुद इसे ,
 घर का जबरन बन गया मालिक जो चोकीदार है ,
 निभ सकी न इससे अब तक अपनी जिम्मेदारियां ,
चन्द दिनों में रुखसती का दिख रहा आसार है ,
सब तेरी मनमानियां सह ली मगर सुन ,
 फैसला करने को जनता देश को तैयार है ,
पूजना शैतान को हमारी मजबूरी नही ,
वोट ही हम लोगो की अहम तलवार है ।

किसी ने अल्लहा के नाम पे तो किसी ने राम के नाम पे

लड़ाया तो हमे सबने


लड़ाया तो हमे सबने ,
किसी ने अल्लाह के नाम पे लडाया ,
किसी ने राम के नाम पे लड़ाया ,
जो नही लड़े उन्हें दगाबाज कह के लड़ाया ।

जो इंसान को इंसान बनाता है

हर दर्द को हम उठाने के लिए तैयार है 


हर दर्द को हम उठाने के लिये तैयार है 
सिर्फ उस एहसास के लिये.....
 वही एहसास ........ 
जो इंसान को इंसान बनाता है ।

नंगी आँखो से देखा जब दुनिया का मंजर

नंगी आँखों से देखा जब दुनिया का मंजर



नंगी आँखो से देखा जब हमने दुनिया का मंजर ।

मुख में बाणी थी मीठी मगर पीठ के पीछे था खंजर ।।

आज यही आलम दुनिया में हर तरफ पसरा है ।

जिस धरती पर नाज था हमें आज हो गया है बंजर ।।

जिस दिन आम आदमी

जिस दिन आम आदमी खुद सुधर जाएंगे



जिस दिन हमारे देश के आम आदमी सुधर जायेगें उस दिन इस देश में भष्ट्राचार फैलाने वाले नही रह पायेगें

अब ठोकरे खाने का मुझे खौफ नही

अब ठोकरे खाने का मुझे खौफ नही



अब ठोकरे खाने का मुझे खौफ नही ,
गिरता हूँ तो और संभल जाता हूँ मैं ,
 फिर एक नये साँचे में ढल जाता हूँ मैं ।

मेरे ही सपने टूट जाते क्यों

मेरे ही सपने टूट जाते क्यूँ


मेरे ही सपने
टूट जाते क्यूँ ,

बनने से पहले
आशियाँ उजड़ जाते क्यूँ ,

फुर्सत में मिलेगें
 तो बताऊंगा ,

समय से पहले
पड़ी है माथे पे
लकीरे क्यूँ ।।

विश्वास में शक्ति है

एक तिनका ही सही विश्वाश की बाते करे





क्यों घुटन नैराश्य , कुंठा त्रास की बातें करे ,
एक तिनका ही सही विश्वास की बातें करे ।

आपका ये दो मुहाँ दर्शन समझ आता नही ,
ले संकल्प फिर सन्यास की बातें करे ।

साथ रहते दुरिया लेकर बहुत दिन जी लिये ,
दूर रहकर अब दिलों से पास की बातें करें ।

खौप के बादल छटे हर स्वप्नदर्शी आँखों से ,
इंद्रधनुषी रंग भी मधुमास की बातें करें ।

दर्द तो दर्द है इसकी जाती की पहचान क्या ,
हर किसी के दर्द के अहसास की बातें करें ।।

अन्याय के विरुद्ध

जब अनाचार और अन्याय के विरुद्द गुस्सा मर जाय तो






जिस देश और समाज में अनाचार और अन्याय के विरुद्ध गुस्सा मर जाय वहां फिर किसी चाणक्य को नन्द के कुशासन के विरुद्ध शिखा खोलनी पड़ती है ।

जीवन एक समर भूमि है

जीवन एक समर भूमि है



यह दुनिया आदमी के मन की दया पर नही बल्कि उसकी कलाई की ताकत पर चला करती है ।आदमी की दुनिया में चल रही सारी दौड़ धूप केवल भोग के लिये होती है ।त्याग की बात मन्दिर , पुराण और कीर्तन में ही ठीक लगती है लिकिन जीवन कोई मन्दिर नही वह एक समर भूमि है ।