अब ठोकरे खाने का मुझे खौफ नही अब ठोकरे खाने का मुझे खौफ नही अब ठोकरे खाने का मुझे खौफ नही , गिरता हूँ तो और संभल जाता हूँ मैं , फिर एक नये साँचे में ढल जाता हूँ मैं । Email ThisBlogThis!Share to XShare to Facebook
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