Saturday, 30 January 2016

ऋण मातृभूमि का चुकाएंगे

 ऋण मातृभूमि का चुकाएंगे



सामना करेंगे  , शक्तिशाली सितंगरों का ,

 दमन का न भय , नाको चने चबवायेंगे ।

 स्वतन्त्रता संग्राम के , तो हम सिपाही है ,

 प्राण देकर , ऋण मातृभूमि का चुकाएंगे ।।

मैं एक नारी हूँ

एक नारी हूँ  



सिसकी सुनकर

 किसी ने उससे कहा

तुम क्यों रोती हो ,

 ब्यर्थ में क्यों

समय खोती हो , 

सहम कर बोली वह , 

अपनों की उपेक्षा की मारी हूँ ,

अपने ही घरो में बनी बेचारी हूँ ,

कहने को तो सबकी प्यारी हुँ ,

पर उपेक्षित , अपमानित एक नारी हूँ ।।

दिल फ़िदा करते है कुरबाने जिगर करते है

    दिल फ़िदा करते है , कुरबाने जिगर करते है






दिल फ़िदा करते है , कुरबाने जिगर करते है ,

पास जो कुछ है , भारत माता की नजर करते है ,

खाने वीरान कहाँ , देखिये घर करते है,

खुश रहो अहले वतन , हम तो सफर करते है ।।

अत्यचार जब निरंकुश हो कर तांडव नर्तन करने लगता है

तब बलिवेदी पर चढ़ने के लिये तत्पर होने के अतिरिक्त

अन्य उपाय ही क्या है ?