जागो अब जागो
जागो अब जागो ,
पहने फूलो का माला ,
बनता जन का रखवाला ,
निर्धन का छीननेवाला ,
करता नित दिन घोटाला ,
बोलता गांधी का भाषा ,
सब बढ़े यही अभिलाषा ,
जन्मे तो घोर निराशा ,
निर्धन नीच हो जाता ,
दो जून नही खा पाता ,
बस ये ही है उन्हें भाता ,
चुने देख भाग्य विधाता ,
निचे धरती ऊपर नेता ,
पंक्षी करते कलरव ,
करते धोखा ये नेता ,
आ गया वक्त अब जागो
अब जागो अब।।
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