Friday, 25 December 2015

पचास साठ करोड़ लोग

सत्ताधीशो के तमाम दावेवेदारियों के बावजूद अभी भी पचास साठ करोड़ लोग बे मकान , बे रोटी लोगो का यह देश जिस अँधेरी सुरंग से गुजर रहा है उसका दूसरा सिर दूर -दूर तक नजर नही आता ।

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