हम लोग कायरता के विरुद्ध पढ़ बोल और सुन तो सकते है पर कर कुछ नही सकते , कायरता का विषाणु हमारे अंदर घुस आये है , तभी तो सर और खौफ का मंजर समाप्त न होता ।अन्याय सहना अन्याय करने से ज्यादा खतरनाक है ।
Friday, 25 December 2015
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
0 टिप्पणियाँ:
Post a Comment