जागो आंधी उठाने का जमाना आ गया है
जागो आंधी उठाने का जमाना आ गया ,
दे रहा आदमी का दर्द अब आवाज दर-दर ,
तुम न जागो तो कहो जमाना क्या कहेगा ,
जब बहररों का नीलाम पतझर कर रहा है ,
तुम नही फिर भी उठे तो आशियाना क्या कहेगा ,
वक्त की तकदीर स्याही से, लिखी जाती नही है ,
खून में कलम डुबोने का जमाना आ गया है ,
बदतमीजी कर रहे है आज ,
फिर भौरे चमन में जागो ,
आंधी उठाने को जमाना आ गया है ।।
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